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गहरी दोस्ती का नया प्रदर्शन: दिल्ली में मिले मोदी-पुतिन

खबर एक नज़र में: पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पालम एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति का व्यक्तिगत स्वागत किया, जिसमें दोनों नेताओं ने गले लगकर अपनी मज़बूत दोस्ती को दर्शाया। इसी दौरान रक्षा संबंधों को गहरा करने और भारतीय झींगे-मछली का रूस में निर्यात बढ़ाने पर भी बातचीत हुई।

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पालम एयरपोर्ट पर अचानक स्वागत: प्रोटोकॉल तोड़ा मोदी ने

गुरुवार की शाम दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर एक ख़ास लम्हा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एयरपोर्ट पर पहुँचे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का व्यक्तिगत स्वागत किया। यह कदम आम तौर पर राजनयिक परंपरा से परे था। मोदी ने पुतिन के विमान के उतरते ही उन्हें गर्मजोशी से गले लगा लिया। दोनों नेताओं के बीच यह गले लगना और हाथ मिलाना दिल्ली की ठंडी शाम में एक गर्म पल बन गया। रनवे पर रखी लिमोज़िन में दोनों ने पचास मिनट तक निजी बातचीत जारी रखी। यह दृश्य साफ़ संदेश दे रहा था कि भारत और रूस की दोस्ती सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित नहीं है।

रक्षा के नए आयाम: आत्मनिर्भर भारत की ओर

पालम एयरपोर्ट पर गर्मजोशी के साथ शुरू हुई यह यात्रा, अगले दिन और गहरी हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रेई बेलौसोव की बैठक में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया। रक्षा संबंध अब सिर्फ़ हथियार खरीदना तक सीमित नहीं रहे हैं। “आत्मनिर्भर भारत” की नीति को ध्यान में रखते हुए, दोनों देश अब साथ मिलकर रक्षा उपकरण बनाने पर काम कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्री ने साफ़ कहा कि रूसी रक्षा उद्योग भारत को स्वदेशी रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में पूरी सहायता देने के लिए तैयार है।

राजनाथ सिंह ने इस दौरान बताया कि भारत अपने रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प है। ब्रह्मोस मिसाइल जैसी संयुक्त परियोजनाओं में पहले से ही सफलता मिल रही है। यह सिर्फ़ नई मिसाइलें खरीदना नहीं है, बल्कि भारत और रूस मिलकर भविष्य की तकनीकें तैयार कर रहे हैं।

झींगा-मछली का सौदा: खाने की प्लेट पर राजनीति

इसी बीच एक और दिलचस्प बातचीत हुई जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहती है। भारत के मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह और रूसी कृषि मंत्री ऑक्साना लुत की बैठक में कुछ आश्चर्यजनक समझौते हुए। रूस ने भारतीय झींगे, मछली और मांस के उत्पादों को आयात करने की अपनी इच्छा दिखाई।

यह कोई छोटी बात नहीं है। भारत पहले से ही रूस को झींगा मछली का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। साल 2024-25 में भारत ने दुनियाभर को सात अरब 45 करोड़ डॉलर की मछली और मछली उत्पाद निर्यात किए, लेकिन रूस को सिर्फ़ 12.7 करोड़ डॉलर की मात्रा भेजी। इसका मतलब यह है कि भारी संभावना अभी बाकी है। रूस ने ट्राउट मछली के विकास के लिए एक संयुक्त तकनीकी परियोजना में भी दिलचस्पी दिखाई है। इस नए आर्थिक सहयोग से दोनों देशों की दोस्ती सिर्फ़ रक्षा क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहेगी।

रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश

मोदी-पुतिन की यह दिल्ली बैठक एक स्पष्ट संदेश दे रही है। भारत अपनी विदेश नीति में अपनी मर्ज़ी चलाएगा। अमेरिका और यूरोपीय संघ के दबाव के बावजूद, नई दिल्ली रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को मज़बूत करते जा रही है। यह “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति को आचरण में लाना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय की दोस्ती, आपसी सम्मान और विश्वास इस बुनियाद हैं।

निष्कर्ष: बदलती दुनिया में पुरानी दोस्ती

इस दो दिवसीय दौरे में 10 से अधिक सरकारी समझौते और 15 से ज़्यादा वाणिज्यिक अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। यह सब कुछ पालम एयरपोर्ट पर मोदी के गले लगाने वाली गर्मजोशी से शुरू हुआ था। भारत और रूस की दोस्ती सिर्फ़ टैंक और मिसाइलों तक सीमित नहीं है। यह झींगा, ट्राउट मछली, तेल, खाद और तकनीकी ज्ञान तक फैली हुई है। एक ऐसी दोस्ती जो बदलती दुनिया में भी अपना रास्ता खुद बना रही है।


सूत्र: यह लेख भारतीय प्रेस सूचना ब्यूरो, व्यापार मानक, हिंदुस्तान टाइम्स और डीडी इंडिया की रिपोर्टों पर आधारित है।

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