Chernobyl का रहस्यमयी Fungus: जो खतरनाक रेडिएशन को भोजन में बदलता है
न्यूक्लियर रिएक्टर के अंदर एक काला कवक Cladosporium sphaerospermum पाया गया जो रेडिएशन को अवशोषित कर उसे ऊर्जा में बदलता है। इसे ‘रेडियोसिंथेसिस’ कहा जाता है। वैज्ञानिक इस अविश्वसनीय क्षमता से हैरान हैं। 🌟
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चेरनोबिल के तहखानों में जीवन की नई परिभाषा
चेरनोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट के विस्फोट के लगभग 40 साल बाद भी यह क्षेत्र इंसानों के लिए वर्जित बना हुआ है। लेकिन वहाँ एक अद्भुत जीव फल-फूल रहा है, जो न केवल जीवित है बल्कि पनप भी रहा है। सबसे रोचक यह कि यह जीव रेडिएशन—जो किसी अन्य प्राणी के लिए मौत का पैगाम है—को भोजन की तरह ग्रहण करता है। 🕳️
वह काला कवक जो असंभव को संभव करता है
वैज्ञानिकों को 1990 के दशक के अंत में चेरनोबिल के खंडहरों में एक आश्चर्यजनक खोज मिली। यूक्रेनियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के सूक्ष्म जीववैज्ञानिक नेली झदनोवा की टीम ने रिएक्टर की दीवारों पर काले रंग के कवक की पूरी कॉलोनी खोजी। शोधकर्ताओं ने कुल 37 प्रजातियों की पहचान की, लेकिन सबसे चौंकाने वाली थी Cladosporium sphaerospermum। यह काला कवक सबसे अधिक दूषित क्षेत्रों में ही फल-फूल रहा था। 🔬
क्या खास है इस कवक में?
इस काले कवक में मेलानिन नामक एक विशेष पिगमेंट होता है। हम जानते हैं कि मेलानिन हमारी त्वचा को यूवी किरणों से बचाता है, लेकिन यहाँ इसका कार्य अलग है। यहाँ मेलानिन पौधों के क्लोरोफिल की तरह काम करता है, जो सूरज की रोशनी को ऊर्जा में बदलता है। वैज्ञानिक इसे “रेडियोसिंथेसिस” कहते हैं। ⚫

2008 में अमेरिका के अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के दो प्रमुख शोधकर्ता एकाटेरिना दादाचोवा और आर्टुरो कासाडेवल ने सिद्ध किया कि यह कवक आयनाइजिंग रेडिएशन को सीधे ऊर्जा में परिवर्तित करता है। जहाँ रेडिएशन अन्य जीवों को नष्ट करता है, वहाँ यह कवक इससे तेजी से बढ़ता है। यानी, यह घातक ऊर्जा उसके लिए पोषण का स्रोत है! 📈
अंतरिक्ष में भी यह कवक सफल रहा
2022 में एक और रोचक प्रयोग हुआ। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसी कवक को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के बाहर भेजा। वहाँ भयंकर कॉस्मिक रेडिएशन के बीच सेंसरों ने दिखाया कि कवक की पतली परत से नियंत्रण की तुलना में कम रेडिएशन गुजरा। इसका मतलब, यह प्राकृतिक रेडिएशन शील्ड की तरह कार्य कर सकता है! 🚀
भविष्य में इसका उपयोग क्या हो सकता है?
इस खोज के दो प्रमुख अनुप्रयोग हैं। पहला, यह कवक अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी अवधि की स्पेस मिशनों में चंद्रमा और मंगल तक जाते समय रेडिएशन से सुरक्षित रख सकता है। दूसरा, रेडियोएक्टिव क्षेत्रों की सफाई में इसका इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। 🔮
क्या वास्तव में रेडियोसिंथेसिस होता है?
यहाँ मजेदार बात है। वैज्ञानिक अभी पूरी तरह सिद्ध नहीं कर पाए कि यह कवक रेडिएशन को ऊर्जा में कैसे बदलता है। स्टैनफोर्ड के शोधकर्ता नील्स एवरेस्क के अनुसार, “वास्तविक रेडियोसिंथेसिस अभी सिद्ध नहीं हुआ। हम कार्बन फिक्सेशन या स्पष्ट ऊर्जा-हॉर्वेस्टिंग पाथवे को प्रदर्शित नहीं कर पाए।” ❓
यह एक रहस्य है जो अभी सुलझना बाकी है
बहरहाल, स्पष्ट है कि प्रकृति हमें हमेशा आश्चर्यचकित करती है। सबसे खतरनाक जगह पर सबसे असंभव तरीके से जीवन पनप जाता है। साइंसअलर्ट की रिपोर्टिंग के अनुसार, यह काला कवक एक स्मरण है कि “लाइफ फाइंड्स अ वेay”—हर परिस्थिति में, हर चुनौती में। 🌿
स्रोत: यह रिपोर्ट साइंसअलर्ट के मिशेल स्टार के लेख और फर्स्टपोस्ट की कवरेज पर आधारित है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के निष्कर्ष प्रकाशित किए गए थे। [ScienceAlert]
