सीमाएँ बदल सकती हैं – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सिंध वाली बात
‘सभ्यतागत रूप से सिंध हमारा है’ – रक्षा मंत्री का बड़ा बयान
नई दिल्ली में आयोजित सिंधी समाज सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है, जो भारत-पाकिस्तान के बीच तूफान मचा गया है। सिंह ने कहा कि भले ही सिंध आज पाकिस्तान का हिस्सा हो, लेकिन “सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा”। उन्होंने आगे कहा, “सीमाएँ बदल सकती हैं। कल सिंध भारत लौट सकता है।” 🗣️
यह बयान सिर्फ भावनात्मक राय नहीं है। सिंह ने इसे भारतीय राष्ट्रगान, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में “पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा” का उल्लेख आज भी सिंध के साथ हमारे गहरे रिश्ते को दर्शाता है। 📜
एलके आडवाणी की यादों में विभाजन का दर्द
सिंह ने अपनी बात को भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी के जीवन से जोड़ा। आडवाणी सिंध से ही आते हैं। सिंह ने कहा कि आडवाणी की पीढ़ी के सिंधी हिंदुओं ने कभी विभाजन को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने सिंधु नदी के पवित्र महत्व को रेखांकित किया, जिसे हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, साथ ही सिंध के कई मुसलमान भी इसे मक्का के आब-ए-ज़मज़म जितना पवित्र मानते हैं। 🌊
सिंह ने कहा, “विभाजन के बाद भारत आए सिंधी हिंदुओं ने शून्य से शुरुआत की, और आज वे भारत के आर्थिक व सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।” 💪
पाकिस्तान का तीव्र प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सिंह के बयान की तुरंत आलोचना की। पाकिस्तान ने इसे “भ्रामक,” “खतरनाक विस्तारवाद” और “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। इस्लामाबाद के बयान में कहा गया कि ऐसे बयान भारत की “हिंदुत्व विस्तारवादी” सोच को दर्शाते हैं।
पाकिस्तान ने आगे कहा कि सिंह को “उत्तेजक भाषा” से बचना चाहिए और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, पाकिस्तान ने कहा कि भारत को अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरे देशों के क्षेत्रों पर। ⚠️
सिंधी अलगाववादी नेता का स्वागत
दिलचस्प बात यह है कि सिंधी अलगाववादी नेता शफी बुरफत (जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज के अध्यक्ष) ने सिंह के बयान का स्वागत किया। बुरफत ने कहा कि सिंह का यह बयान “ऐतिहासिक और प्रेरणादायक” है। उन्होंने कहा कि सिंध एक ऐसे “कॉन्फेडरेशन” के लिए तैयार है, जो भारत के साथ साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते पर आधारित हो। 🤝
तनाव का संदर्भ
यह बयान उस समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं। मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए गए थे। सिंह ने अपने बयान में पीओके में बढ़ती प्रो-इंडिया भावनाओं का भी जिक्र किया। ⚡
निष्कर्ष
राजनाथ सिंह का यह बयान सिर्फ राजनीतिक टिप्पणी नहीं है – यह भारतीय सभ्यता, विभाजन के दर्द और भू-राजनीति के बीच जटिल संवाद को दर्शाता है। जबकि पाकिस्तान इसे विस्तारवाद कहता है, भारत इसे सांस्कृतिक विरासत की पुनः घोषणा मानता है। यह बहस आने वाले दिनों में कितनी तीव्र होगी, यह देखना बाकी है। 🌟
स्रोत: इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस, द वायर, फर्स्टपोस्ट, और पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान।
डिस्क्लेमर: यह लेख सूचना उद्देश्य से है। जीएमटी न्यूज़ राजनीतिक घटनाओं पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग का प्रयास करता है, लेकिन पाठक स्वयं तथ्यों की जाँच करें। कोई कानूनी सलाह नहीं।
