Trump की 1bn$ धमकी

नमस्ते, GMT News के नए अपडेट में स्वागत है! 📰

BBC में बड़ा हड़कंप: दो टॉप अधिकारियों का इस्तीफा, ट्रंप ने $1 अरब मुकदमे की चेतावनी दी 🚨

ब्रिटेन की प्रमुख प्रसारण संस्था बीबीसी में भूचाल आ गया है। रविवार को बीबीसी के डायरेक्टर जनरल टिम डेवी और न्यूज चीफ डेबोरा टर्नेस ने अपने पद छोड़ दिए। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीबीसी पर 1 अरब डॉलर (लगभग 8,800 करोड़ रुपये) का मानहानि मुकदमा ठोकने की धमकी दे दी।

पूरा मामला क्या है? 🤔

द गार्जियन के मुताबिक, यह विवाद एक पैनोरमा डॉक्यूमेंट्री से भड़का, जिसका टाइटल था “ट्रंप: ए सेकंड चांस?”। यह शो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक हफ्ता पहले दिखाया गया था। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सामने आया कि बीबीसी ने ट्रंप के 6 जनवरी 2021 के भाषण को इस तरह काट-छांट किया कि ऐसा लगे मानो वे कैपिटल हिल दंगे भड़का रहे थे।

बीबीसी ने ट्रंप के भाषण के दो अलग-अलग हिस्सों को जोड़ दिया, जो वाकई में 50 मिनट के फासले पर बोले गए थे। एडिटेड वर्जन में ट्रंप को ये कहते दिखाया: “हम कैपिटल की ओर चलेंगे… मैं तुम्हारे साथ रहूंगा… और लड़ो, नर्क की तरह लड़ो।” लेकिन हकीकत में ये लाइनें अलग-अलग संदर्भों में कही गई थीं।

किसने बुलंद की आवाज? 📣

बीबीसी के पूर्व सलाहकार माइकल प्रेस्टकॉट ने बोर्ड को 8,000 शब्दों का एक मेमो भेजा। बीबीसी के अनुसार, प्रेस्टकॉट ने तीन साल तक एडिटोरियल गाइडलाइंस एंड स्टैंडर्ड्स कमिटी के सलाहकार रहे और जून 2025 में “गंभीर चिंताओं” से इस्तीफा दे दिया था।

अपने मेमो में उन्होंने बीबीसी पर “गंभीर और संगठित पूर्वाग्रह” का इल्जाम लगाया। ट्रंप भाषण एडिट के अलावा गाजा कवरेज, ट्रांसजेंडर मुद्दों और तमाम टॉपिक्स पर बीबीसी की रिपोर्टिंग पर उंगली उठाई।

बोर्ड में कलह और राजनीतिक दबाव 🎭

द गार्जियन की गहन रिपोर्ट के अनुसार, बीबीसी बोर्ड की स्पेशल मीटिंग में डेबोरा टर्नेस को प्रेस्टकॉट के आरोपों पर एक घंटे से ज्यादा “जिरो” किया गया। बोर्ड मेंबर रॉबी गिब, जो पूर्व पीएम थेरेसा मे के कम्युनिकेशन चीफ रह चुके हैं, ने इन इल्जामों को “जल्दी से उछाला”।

कई बीबीसी सोर्सेज ने गार्जियन को बताया, “गलती न करें, ये एक तख्तापलट था।” इसके पीछे राजनीतिक दखल की आशंका है। गिब को 2021 में बोरिस जॉनसन सरकार ने बोर्ड में डाला था।

ट्रंप का गुस्सा और कानूनी धमकी ⚖️

बीबीसी की रिपोर्टिंग के मुताबिक, ट्रंप की लीगल टीम ने रविवार को बीबीसी को लेटर भेजा। इसमें 14 नवंबर तक डॉक्यूमेंट्री हटाने, माफी मांगने और मुआवजा देने की डिमांड की गई। न मानने पर ट्रंप “कम से कम 1,000,000,000 डॉलर (एक अरब डॉलर) का हर्जाना” मांगते हुए कोर्ट जाएंगे।

ट्रंप की लीगल टीम के स्पोक्सपर्सन ने कहा: “बीबीसी ने राष्ट्रपति चुनाव में दखल देने के लिए जानबूझकर और धोखे से डॉक्यूमेंट्री एडिट कर राष्ट्रपति ट्रंप को बदनाम किया।”

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया: “टेलीग्राफ को शुक्रिया कि उन्होंने इन भ्रष्ट ‘पत्रकारों’ को बेनकाब किया। ये बेहद बेईमान लोग हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में छेड़छाड़ की कोशिश की।”

बीबीसी की सफाई 🛡️

बीबीसी के चेयरमैन समीर शाह ने सोमवार को स्टेटमेंट जारी कर इस एडिट के लिए सॉरी बोला और इसे “निर्णय की भूल” करार दिया। उन्होंने माना कि भाषण को ऐसे एडिट करने से “हिंसक ऐक्शन का डायरेक्ट कॉल” जैसा फील हुआ।

हालांकि, शाह ने “इंस्टीट्यूशनल बायस” के आरोपों को रिजेक्ट करते हुए कहा, “बीबीसी में कोई सिस्टमैटिक बायस नहीं है।” बीबीसी ने बताया कि ट्रंप के लीगल लेटर की रिव्यू करेगी और “समय पर जवाब” देगी।

बीबीसी का भविष्य संकट में 🔮

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये संकट उस वक्त आया जब ब्रिटिश सरकार बीबीसी के फंडिंग मॉडल की जांच कर रही है। बीबीसी का 10 साल का चार्टर 2027 में खत्म हो रहा है। लाइसेंस फी मॉडल पुराना पड़ रहा क्योंकि दर्शक नेटफ्लिक्स, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स की तरफ मुड़ रहे हैं।

ये घटना बीबीसी के लिए करारा झटका है, क्योंकि इसकी सबसे बड़ी कैपिटल “ट्रस्ट” है। कई एनालिस्ट्स मानते हैं कि ये विवाद बीबीसी की निष्पक्षता और क्रेडिबिलिटी पर सवाल खड़े करता है—जो किसी पब्लिक ब्रॉडकास्टर के लिए सबसे क्रूशियल है। बीबीसी विवाद: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ट्रंप ने बीबीसी पर मुकदमा क्यों किया?

ट्रंप का दावा है कि बीबीसी की पैनोरमा डॉक्यूमेंट्री ने उनके 6 जनवरी 2021 भाषण को गलत तरीके से एडिट कर उन्हें बदनाम किया, जिससे चुनाव में दखल की कोशिश हुई।

टिम डेवी और डेबोरा टर्नेस ने इस्तीफा क्यों दिया?

उन्होंने आंतरिक रिपोर्ट और बोर्ड मीटिंग के दबाव में पद छोड़े, जहां एडिटिंग स्कैंडल और पूर्वाग्रह के आरोपों पर बहस हुई।

बीबीसी का फंडिंग मॉडल क्या बदल सकता है?

हां, 2027 में चार्टर खत्म होने पर सरकार नया मॉडल ला सकती है, खासकर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते असर के बीच।

क्या ये राजनीतिक साजिश थी?

कई सोर्सेज इसे राजनीतिक दखल मानते हैं, खासकर कंजर्वेटिव बोर्ड मेंबर्स की भूमिका से।

स्रोत: [The Guardian, BBC, Telegraph, Reuters, Times of India, Independent, Deadline, Al Jazeera, ABC Australia, New York Times]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *